केरल में सूखे कचरे की यात्रा घर के दरवाजे पर खत्म नहीं होती। स्थानीय निकायों के साथ काम करने वाली हरित कर्म सेना गैर-जैविक कचरा नियमित अंतराल पर लेती है, उसे सामग्री संग्रह केंद्रों तक पहुंचाती और अलग-अलग किस्मों में छांटती है। केरल सरकार के विवरण में कम-से-कम दो सदस्य प्रति वार्ड और लगभग 250 घर प्रति सदस्य का कार्य-ढांचा बताया गया है। सेवा शुल्क स्थानीय निकाय तय करता है। घर की भूमिका भी साफ है: गैर-जैविक कचरा अलग और साफ रखकर देना, ताकि गीले कचरे से सामग्री खराब न हो।
एक बोरी के पीछे कई पड़ाव
संग्रह के बाद सामान mini-MCF और फिर Material Collection Facility यानी MCF पहुंचता है। वहां प्लास्टिक, बोतल, धातु, बल्ब, ट्यूब और ई-कचरे जैसी श्रेणियां अलग की जाती हैं। पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक संबंधित कंपनियों को जाता है। बाकी प्लास्टिक Resource Recovery Facility यानी RRF में काटकर सड़क कार्य जैसे उपयोगों की दिशा पा सकता है। Kerala Economic Review 2024 ने 1,233 MCF, 19,112 mini-MCF और 197 चालू RRF दर्ज किए। उसने 1,034 स्थानीय निकायों में 37,765 हरित कर्म सेना सदस्यों द्वारा करीब 66.8 लाख घरों को सेवा देने की बात भी कही।
QR से जवाबदेही की एक परत
हरित मित्रम ऐप घर और संस्थान पर QR कोड से संग्रह दर्ज करता है। सरकारी विवरण के अनुसार इसमें सेवा, लिया गया शुल्क, बेची गई सामग्री और MCF/RRF से आगे उठान की जानकारी जोड़ी जाती है; नागरिक कमी या स्थानीय प्रदूषण की शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। Economic Review 2024 में ऐप 1,019 स्थानीय निकायों में लागू बताया गया। संख्या बड़ी है, फिर भी QR स्कैन अपने आप यह सिद्ध नहीं करता कि हर वस्तु पुनर्चक्रित हो गई। असली जवाबदेही तब बनती है जब छंटाई, वजन, अगली एजेंसी और अंतिम उपयोग का रिकॉर्ड जुड़ा हो। दूसरे शहरों के लिए केरल का उपयोगी पाठ ऐप की नकल भर नहीं, महिला समूह, स्थानीय शुल्क, संग्रह केंद्र और आगे की खरीदार कड़ी को एक साथ बनाना है।
मुख्य बातें
- Economic Review 2024 ने 1,034 स्थानीय निकायों में 37,765 हरित कर्म सेना सदस्यों और करीब 66.8 लाख घरों की सेवा दर्ज की।
- साफ रखा गैर-जैविक कचरा घर से mini-MCF, फिर MCF और जरूरत पर RRF जाता है।
- हरित मित्रम ऐप 1,019 स्थानीय निकायों में लागू बताया गया; QR स्कैन सेवा का रिकॉर्ड है, कचरे के पुनर्चक्रण का अकेला प्रमाण नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- Government of Kerala · Kerala towards sustainable sanitation through scientific waste management systems ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- Kerala State Planning Board · Economic Review 2024, Chapter 12 — Local Governments and Decentralised Planning ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



